कुछ बातें बोली नही जाती तो वो अनकही हो जाती हैं उन अनकही बातों को इन पन्नों पर उतारा है।

Friday, 6 April 2018

तेरी उड़ान

भर लेगा तू एसी उड़ान
जो देखें ज़माने कई
बदलेगा जो लकीरों को
तू लिख दे कहानी नयी
ये हिम्मतों का दौर है
जग जीतने की होड़ है
रख ऊँचा जज़्बा,ईमान
जीतेगा तू सारा जहान
पंखों का तू मोहताज ना
सच्ची है तेरी साधना
खुद ही उमंग के पंख लगेंगे
सलामी को सिर लाखों झुकेंगे
सारा है तेरा आसमान
तेरी उड़ान की यही दास्तान
                        #आँचल

14 comments:

  1. वाह...
    बेहतरीन...
    सादर

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    1. बहुत बहुत आभार 🙇

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  2. आपने गूगल फॉलोव्हर गैजेट नहीं लगाया अब तक
    जाइए...हम कमेंट नहीं करते
    सादर

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    1. क्षमा कीजिएगा मैम हमने gadget लगाया है पर वो page पे दिख ही नही रहा है

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  3. बहुत सुंदर जज्बा जगाती रचना, बेहतरीन शब्द संयोजन।

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    1. बहुत बहुत आभार दीदी जी
      आपको पसंद आयी सार्थक हो गयी

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक ९ अप्रैल २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. अति आभार दीदी जी
      बिलकुल आऊँगी

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  5. बेहतरीन रचना

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद दीदी जी

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  6. बहुत सुन्दर....

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  7. वाह अनुपम सृजन

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