Thursday, 30 December 2021
इस नववर्ष एक नई रीत का शुभारंभ करते हैं।
Tuesday, 28 December 2021
लीलाधर मुस्कावे रे
पट-पीतांबर,अधर मनोहर
मधुर-मधुर मुरलिया बाजे,
गल बैजंती माला राजे,
मोर-मुकुट,छलिया,घनश्यामा
बृजवासिन को चैन चुरावे,
गाए-गाए गुण ग्वाल सब झूमे,
ग्वालिन भोग ख्वावे रे,
धेनु उड़ावे धूरी घन-घन पर,
सुरवर बहुत पछतावे रे,
देखि दशा अस सुरजन की
लीलाधर मुस्कावे रे।
#आँचल
Thursday, 16 December 2021
कर क्रीड़ा कोई हरि सुंदर
Tuesday, 14 December 2021
आज पर अधिकार
Monday, 28 June 2021
चंदा कैसे हैं सबके मामा?
Wednesday, 16 June 2021
मैं करती रहूँगी प्रयास
जब भी जन-जागरण हेतु
लेखनी उठाती हूँ
और पुनः प्रयास को सज होती हूँ
एक परोक्ष-सी लड़की की अट्टहास
मेरे कानों में गूँजती है
और तभी अँधेरा छा जाता है,
उस घोर अंधकार से ' निराशा ' आती है,
मुझे देख मुस्कुराती है,
मेरा आलिंगन करती है
और सांत्वना देने का ढोंग करते हुए
मुझसे कहती है -
" व्यर्थ हैं तुम्हारे सारे प्रयास।
छोड़ दो यह पागलपन
और सबकी तरह तुम भी
स्वयं पर विचार करो,
स्वार्थ का शृंगार करो।"
पर मैं हठी, तंज़ निगाहों से
उसकी ओर देखती हूँ
फिर अधरों पर
मुस्कान को सजाते हुए
उससे कहती हूँ -
"मैं करती रहूँगी प्रयास।
आज भी और मेरे अंत के पश्चात भी।"
#आँचल

