आज हरि मैं दर तेरे आई। -2
कल इस जग के काम बहुत थे,
राग बहुत,अनुराग बहुत थे
ता में तेरी सुध बिसराई,
आज हरि मैं दर तेरे आई।-2
हाय!कैसी विपदा आई?
विपदा जो आई सुध तेरी लाई,
सुध आई तब कीरति गाई,
आज हरि मैं दर तेरे आई।-2
#आँचल
कल इस जग के काम बहुत थे,
राग बहुत,अनुराग बहुत थे
ता में तेरी सुध बिसराई,
आज हरि मैं दर तेरे आई।-2
हाय!कैसी विपदा आई?
विपदा जो आई सुध तेरी लाई,
सुध आई तब कीरति गाई,
आज हरि मैं दर तेरे आई।-2
#आँचल
पट-पीतांबर,अधर मनोहर
मधुर-मधुर मुरलिया बाजे,
गल बैजंती माला राजे,
मोर-मुकुट,छलिया,घनश्यामा
बृजवासिन को चैन चुरावे,
गाए-गाए गुण ग्वाल सब झूमे,
ग्वालिन भोग ख्वावे रे,
धेनु उड़ावे धूरी घन-घन पर,
सुरवर बहुत पछतावे रे,
देखि दशा अस सुरजन की
लीलाधर मुस्कावे रे।
#आँचल