कुछ बातें बोली नही जाती तो वो अनकही हो जाती हैं उन अनकही बातों को इन पन्नों पर उतारा है।

Sunday, 21 January 2018

देखो ऋतुराज बसंत है आया

देखो ऋतुराज बसंत है आया

देखो ऋतुराज बसंत है आया
उत्सव उमंग के रंग है लाया
देखो ऋतुराज बसंत है आया

जब सुनी कलरव की हिंडोल नाद
और बही बसंत की मस्त बहार
तब नव उत्थान का समय है आया
देखो ऋतुराज बसंत है आया

जब अलसी संग नाचे कुसुम
और सजी धरती जैसे सुंदर कुंज
तब सरसों ने ब्याह रचाया
देखो ऋतुराज बसंत है आया

जब पेड़ों पे पल्लव आए
और भौरों ने सोहर गाए
तब प्रकृति ने उत्सव मनाया
देखो ऋतुराज बसंत है आया

देखो ऋतुराज बसंत है आया
उत्सव उमंग के रंग है लाया
देखो ऋतुराज बसंत है आया

                              -आँचल 

8 comments:

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    1. Bahot accha kiya jo blog create kr liya. Acchi setp h
      Aur poems hamesha ki traha kamaal ki h

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    2. Bahot accha kiya jo blog create kr liya. Acchi setp h
      Aur poems hamesha ki traha kamaal ki h

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    3. बहुत बहुत धन्यवाद मंजु जी
      शुभ रात्रि 🙏

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