मै नारायण की दासी मै हरी दर्शन की प्यासी
मोहे पल पल तेरी याद सतावे,
मन व्याकुल तेरे गीत ही गावे,
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
मै नारायण की दासी मै हरी चरणन को तरसी
तेरी चरण रज निज माथे लगाऊँ,
नित चरणों की सेवा मै पाऊँ,
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
मै नारायण की दासी मेरे हरी कण कण के वासी
मम हृदय में वास करो प्रभु,
पूर्ण समर्पण स्वीकार करो प्रभु,
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ
-आँचल






