कुछ बातें बोली नही जाती तो वो अनकही हो जाती हैं उन अनकही बातों को इन पन्नों पर उतारा है।

Thursday, 10 May 2018

इबादतों में इश्क इकरार हुई

इंतजार में तेरे मेरी रातें सब बदनाम हुई
गुलज़ार दिनों की रौनक भी बस नज्मों पर तमाम हुई

खैर मक़्दम को तेरे रोज़ गुलाबों से महकाई फीज़ा
तेरी बेखुदी को देख महफ़िल-ए-गुलाब गम्जदा हुई

तेरे उल्फत के जो मैंने जाम पीए ख्वाबों के नशे में मैं डूब गयीं
ढल रहा है शबाब मेरा पर दिल की धड़कने जवान हुई

ये मेरी वफ़ा का आलम है जो बेपनाह इंतजार में दिल हर पल बेकरार रहा
ज़माने की गफलतों में मैं ढल गईं मेरी कहानी खुली किताब हुई

इज़हार-ए-मोहब्बत ए खुदा तेरे नाम की सरेआम की
इबादत-ए-इश्क में होकर फ़ना मेरी रूह भी बस तेरे नाम हुई

इंतजार,इज़हार,गुलाब,ख्वाब,वफ़ा,नशा
ए खुदा तुझे पाने की सरेआम कोशिशें तमाम हुई

दर दर भटकती निगाहों को खुदी में तेरा दीदार हुआ
रूह से रूह मेरी मिली कारवाँ-ए-ज़िंदगी तमाम हुई,इबादतों में इश्क इकरार हुई
इबादतों में इश्क इकरार हुई
   
                                        #आँचल

15 comments:

  1. बहुत सुंदर आंचल बहन मीरा की इबादत या आत्मा का राग जो भी है बहुत पावन सा।

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    1. मीरा की इबादत भी है राधा की चाहत भी है उस हर आत्मा का राग है जो बस उस परमात्मा से इश्क कर तड़पता है
      आपको पसंद आयी सार्थक हो गयी कुसुम दीदी
      बहुत बहुत धन्यवाद इस मनमोहक टिप्पणी के लिए

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  2. वाह !!!बहुत खूबसूरत।मन को छू गई आप की रचना। लाजवाब !!!

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय नीतू दीदी आपकी इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए 🙇

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक १४ मई २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. प्रति उत्तर में देरी के लिए क्षमा
      बिलकुल आऊँगी बहुत बहुत धन्यवाद दीदी जी

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  4. बेहद खूबसूरत रचना।

    मेरे सामान्य से शेर को एक भक्ति की मोहब्बत से जोड़ दिया आपने
    इस रचना को कोई सानी नहीं।

    आभार

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    1. आदरणीय रोहीताश जी जिस शेर को आप सामान्य कह रहे हैं उसे पढ़कर लगा नही था की दो शब्द भी इस पर लिख पाऊँगी पर कोशिश की आपके शेर को अपने रंग ढंग में ढाल कर प्रस्तुत करने की जो आपको पसंद आयी हमारी कोशिश सफल हो गयी सराहना के रूप में पंक्तियों का मान बढ़ाने के लिए आभार
      शुभ दिवस
      जय श्री कृष्णा 🙇

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  5. अद्भुत रचना..
    इबादत, चाहत,राग,अनुराग को समाविष्ट करती रचना।

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय पम्मी जी आपके द्वारा इस उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए 🙇

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  6. वाह!!बहुत सुंदर ।

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    1. पंक्तियों का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय शुभा जी
      शुभ दिवस

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  7. खूबसूरत रचना, इश्क को सूफियाना रंग देती हुई। बधाई।

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय मीना जी
      रचना का मान बढ़ाने के लिए
      शुभ संध्या शुभ दिवस

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  8. बेहद खूबसूरत रचना

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