बस यही प्रयास कि लिखती रहूँ मनोरंजन नहीं आत्म रंजन के लिए

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Thursday, 10 May 2018

इबादतों में इश्क इकरार हुई

इंतजार में तेरे मेरी रातें सब बदनाम हुई
गुलज़ार दिनों की रौनक भी बस नज्मों पर तमाम हुई

खैर मक़्दम को तेरे रोज़ गुलाबों से महकाई फीज़ा
तेरी बेखुदी को देख महफ़िल-ए-गुलाब गम्जदा हुई

तेरे उल्फत के जो मैंने जाम पीए ख्वाबों के नशे में मैं डूब गयीं
ढल रहा है शबाब मेरा पर दिल की धड़कने जवान हुई

ये मेरी वफ़ा का आलम है जो बेपनाह इंतजार में दिल हर पल बेकरार रहा
ज़माने की गफलतों में मैं ढल गईं मेरी कहानी खुली किताब हुई

इज़हार-ए-मोहब्बत ए खुदा तेरे नाम की सरेआम की
इबादत-ए-इश्क में होकर फ़ना मेरी रूह भी बस तेरे नाम हुई

इंतजार,इज़हार,गुलाब,ख्वाब,वफ़ा,नशा
ए खुदा तुझे पाने की सरेआम कोशिशें तमाम हुई

दर दर भटकती निगाहों को खुदी में तेरा दीदार हुआ
रूह से रूह मेरी मिली कारवाँ-ए-ज़िंदगी तमाम हुई,इबादतों में इश्क इकरार हुई
इबादतों में इश्क इकरार हुई
   
                                        #आँचल