आत्म रंजन

बस यही प्रयास कि लिखती रहूँ मनोरंजन नहीं आत्म रंजन के लिए

आत्म रंजन

बस यही प्रयास कि लिखती रहूँ मनोरंजन नहीं आत्म रंजन के लिए

Tuesday, 31 January 2023

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'छोटी जाति' और 'बड़ी जाति' ये दो शब्द हमे हमारी मूर्खता का प्रमाण देते हैं।सृजनकर्ता ने जब हमारे सृजन में कोई भेद नहीं किया त...
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बाल साहित्य की उपेक्षा क्यों?

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हिंदी साहित्य में बाल साहित्य का सदा से अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पर अफ़सोस आज के इलेक्ट्रानिक युग में ये बाल मन तक पहुँच नही पा रहा औ...
Thursday, 19 January 2023

जग रही हूँ मैं अकेली या कहीं कोई और भी है?

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  जग रही हूँ मैं अकेली  या कहीं कोई और भी है? यामिनी से जूझते  उस सुनहरे भोर का  क्या कहीं कोई ठौर भी है? है कहीं कोई हृदय  व्याकुल जगत संता...
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Sunday, 1 January 2023

बेचारा ' नव वर्ष '

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पटाखों के शोर और आतिशबाज़ी के धुएँ में नहा-धोकर पधारे हमारे प्यारे 'नव वर्ष' का दम तो आते ही धर्म-मज़हब जाति,वर्ग आदि के भेद से गुलशन ...
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Monday, 26 December 2022

स्वाभिमान की भूख

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निशातगंज चौराहे पर पुल के नीचे, दस - ग्यारह साल का वह बच्चा, मैले कपड़े,बिखरे बाल, धूल से सने उसके चंचल पाँव जगह - जगह दौड़कर  मेरे आगे ठहरे, ...
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Thursday, 1 December 2022

सावधान!

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मशालें बुझने लगी हैं, अँधेरे की ताक़त बढ़ने लगी है, और कर्तव्य-पथ से भटके हुए  ढ़ीठ,आलसी,लापरवाह लोग सो रहे हैं। सावधान! जनता के महल को लूटा ज...
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Tuesday, 8 November 2022

यह कविता की बंजर शाला

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  कोरे पृष्ठों पर अंकित होती  प्रेम-सुमन-सी अक्षरमाला, छंद-छंद कूके कोकिल और  छम-छम नाचे सुंदर बाला। वह युग कब का बीत चुका है, यह कविता की ब...
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