आत्म रंजन
बस यही प्रयास कि लिखती रहूँ मनोरंजन नहीं आत्म रंजन के लिए
आत्म रंजन
बस यही प्रयास कि लिखती रहूँ मनोरंजन नहीं आत्म रंजन के लिए
Thursday, 17 October 2024
ओ शरद के चाँद
›
ओ शरद के चाँद तुमसे रौशन हैं आज उम्मीदों के वो मकान जो समय के साथ बढ़ते इस स्याह अँधेरे में गुम हो गए थे, भूल गए थे कर्तव्य ...
3 comments:
Monday, 14 October 2024
बुझा दो क्रांति की ये मशालें
›
बुझा दो क्रांति की ये मशालें इन रातों को अँधेरे प्यारे हैं झूठ के नशे में धुत है जनता, इन्हें खर्राटे प्यारे हैं! क्या कहा? नय...
1 comment:
Friday, 20 September 2024
गप्प-क्रांति
›
हो रही तलाश अस्त हो चुके सूर्य को ढूँढ़ लाने की या चल रही कोई साज़िश रश्मियाँ बटोर नया सूर्य बनाने की, झूठी ही सही, एक पहचान पाने की। अर...
4 comments:
Friday, 16 February 2024
मूल ' मैं ' की तलाश में
›
एक मैं हूँ और मेरे कितने सारे 'मैं' जो मुझमें हर क्षण बनते और बिगड़ते हैं और रोज़ मुझ ही से लड़ते हैं कुछ बिल्कुल मुझसे लगते हैं और...
4 comments:
Thursday, 15 February 2024
संसारों के सृजन में गुम होता इंसान
›
इस एक संसार में रहकर अनेक संसारों को जानने की कोशिश और उन अनेक संसारों के प्रतिसंसार को देखने की कोशिश में रत इंसान रच देता है फिर एक संसा...
1 comment:
Tuesday, 24 October 2023
आँसू
›
Sunday, 1 October 2023
पिता की भूमिका में एक भाई
›
एक पुरुष अपने सर्वोत्तम रूप में होता है जब वह एक पिता की भूमिका में होता है, भूख,प्यास,थकान से कुछ ऊपर होता है, अपनी संतान के जीवन में सुख ...
5 comments:
‹
›
Home
View web version